देश: महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद में अब बड़ा मोड़ सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद उनके पुराने स्कूल साथी असगर अली वोरा को विवादित जमीन के मामले में राहत मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है।
81 वर्षीय असगर अली वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन को लेकर शिकायत रखी थी। वोरा का दावा है कि उन्होंने यह जमीन 1989 में खरीदी थी और बाद में इस पर कब्जे को लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने इस मामले में लंबे समय से अलग-अलग सरकारी विभागों में शिकायत करने की बात कही थी।
वोरा ने आरोप लगाया था कि जमीन से जुड़े विवाद में कुछ बिल्डरों और नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी की भूमिका रही। हालांकि जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं। नरेंद्र मेहता का कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी।
पीएम से मुलाकात के बाद संबंधित अधिकारियों और दोनों पक्षों के बीच बैठक भी हुई। इसके बाद नरेंद्र मेहता की ओर से विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने तथा निर्माण अनुमति वापस करने की बात सामने आई। साथ ही वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी भी दी गई। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात कही गई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दशकों पुराने विवाद में पीएम मोदी से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। हालांकि जमीन विवाद से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर संबंधित प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण रहेगी।
